कविताएं मेरे जीवन में बस मेरे शौक या मेरे गीत भर नहीं हैं, ये मेरे जीवन की आज तक की हर परिस्थितियों में ये मेरी सच्ची दोस्त, कभी अच्छी और सच्ची मार्गदर्शक और कभी मुझको, अलग आईना दिखाने का काम किया है। कभी ये मरी हिम्मत बनी तो कभी मेरे संघर्षशील जीवन में हंसी, और सकून का कारण बनी है ये मेरी जीवन की गुनगुनाहट है, जो जीवन की अलग-अलग परिस्थितियों में मेरे अन्दर एक धुन के साथ चलती रहती हैं।
अंततः, मेरे भीतर के कवि ने करवट ली और मैंने अपनी पहली डायरी जिसका नाम मैंने 'माँ' रखा था, उसमें कुछ शब्दों को सँजोकर और पिरोकर अपनी शुरुआती पंक्तियों को आकार देना शुरू किया। इस प्रकार, एक डाँट से उपजी आत्मग्लानि ने मुझे शब्दों की दुनिया से जोड़ दिया।
"जब खून एक है, जात एक है, क्यों लड़ती है दुनिया, जब धर्म एक है।"
शुरुआत के समय में मेरे द्वारा लिखी और बनायी गईं कुछ पंक्तियों में से हैं। फिर धीरे-धीरे ये सिलसिला यूँ ही चलता रहा।