दुनिया की अनेकों भाषाओं में स्तालिन की जीवनी या जीवनियों का अभाव नहीं, यद्यपि उनमें कितनी ही बातों की कमियाँ देखी जाती है। पर, हिन्दी में तो प्रायः उनका अभाव ही है। वैसे स्तालिन के ऐतिहासिक जीवन ही नहीं, बल्कि भावी संसार के पथ- प्रदर्शक के रूप के प्रति अपनी श्रद्धा प्रकट करना भी एक उद्देश्य हो सकता था, जिसके कारण मुझे लेखनी उठानी पड़ती। मैं यह मानता हूँ कि इस जीवनी में भी एक त्रुटि दिखाई पड़ेगी, जो त्रुटि दूसरी भाषाओं की जीवनियों में भी देखी जाती है। वह है-वैयक्तिक जीवन की घटनाओं की कमी। मैं उनकी खोज में हूँ, लेकिन उनके प्राप्त करने तक पुस्तक लिखने या उसे प्रकाशित करने से रोके रखना, इसे अनिश्चित काल के लिये स्थगित करना होता। दूसरे संस्करण में, मुझे आशा है, उस दिशा में भी मैं कुछ और चीजें पाठकों को दे सकूँगा। स्तालिन का जीवन केवल ज्ञानवर्द्धन का साधन ही नहीं है, बल्कि वह पग-पग पर गहन कर्म-पथ पर प्रकाश डालता है।