मेरी आत्मकथा, जिसे मूकनायक के नाम से भी जाना जाता है, डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर द्वारा मराठी में लिखी गई एक आत्मकथा है। यह पुस्तक १९३५ में प्रकाशित हुई थी यह पुस्तक डॉ. आंबेडकर के जीवन और अनुभवों का एक क्रमिक वर्णन है, जिसमें उन्होंने जाति व्यवस्था, सामाजिक बहिष्कार और अस्पृश्यता के खिलाफ अपने संघर्षों को उजागर किया है। वे अपनी शिक्षा, विदेश में अध्ययन, कानूनी पेशेवर के रूप में अपना काम, और राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में अपने योगदानों का भी वर्णन करते हैं।
'मेरी आत्मकथा' दलित साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना है। यह एक ऐसे व्यक्ति की प्रेरक कहानी है जिसने अत्यधिक विपरीत परिस्थितियों में भी शिक्षा प्राप्त की और समाज में सबसे वंचित वर्गों के उत्थान के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। यह पुस्तक जाति व्यवस्था की भयावहता और सामाजिक न्याय की लड़ाई के महत्व को उजागर करती है।