Carte Dhananjay Pratap Narayan Singh

Dhananjay

Limbă: hindi
Legare: Carte broșată
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अरे! ये तो साक्षात महादेव हैं! क्या मैं अभी तक महादेव से युद्ध कर रहा था! सोचकर मेरा रोम-रोम सिहर उठ...

Informații despre carte

Limbă
hindi
Legare
Carte - Carte broșată
Publicat
2021
Pagini
332
EAN
9789390504190
ISBN
9390504198
Enbook ID
37171529
Greutate
386
Dimensiuni
140 x 216 x 18

Descriere completă

अरे! ये तो साक्षात महादेव हैं! क्या मैं अभी तक महादेव से युद्ध कर रहा था! सोचकर मेरा रोम-रोम सिहर उठा। उन्हें सामने देखकर मन में भावनाओं का प्रबल ज्वार उठा और एक तरंग नख से शिख तक प्रवाहित हो गई। मैं दौड़कर उनके पास गया और दंडवत मुद्रा में लेट गया।
उन्होंने मुझे कंधे से पकड़कर ऊपर उठाया और बोले, "फाल्गुन! मैं तुम्हारे इस अनुपम पराक्रम, शौर्य और धैर्य से बहुत संतुष्ट हूँ। तुम्हारे समान दूसरा कोई क्षत्रिय नहीं है। तुम्हारा तेज और पराक्रम मेरी प्रशंसा का पात्र है।" उनके शब्द मेरे कानों में शहद की तरह पड़ रहे थे। मेरे मन और प्राण का कोना-कोना सिक्त हो रहा था। इस आनंद का अनुभव मेरे लिए नवीन था। भावनाओं के अतिरेक से मेरे नेत्र बंद हो गए।
उन्होंने आगे कहा, "मेरी ओर देखो भरतश्रेष्ठ! मैं तुम्हें वरदान देता हूँ कि तुम युद्ध में अपने शत्रुओं पर, वे चाहे सम्पूर्ण देवता ही क्यों न हों, विजय पाओगे। मैं तुम्हें अपना पाशुपत अस्त्र दूंगा, जिसकी गति को कोई नहीं रोक सकता। तुम शीघ्र ही मेरे उस अस्त्र को धारण करने में समर्थ हो जाओगे। समस्त त्रिलोक में कोई ऐसा नहीं है, जो उसके द्वारा मारा न जा सके
मैं अपने घुटनों पर बैठ गया और उनके चरणों पर मैंने अपना सिर रख दिया। मेरी आँखों से आँसू झरने लगे। मेरे आराध्य मेरे सम्मुख खड़े थे। मुझे आशीर्वाद दे रहे थे।
-इसी पुस्तक से.

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