Carte अनहद कहता कुछ बहका बहका मन... अनिल सक्सेना 'अ

अनहद कहता कुछ बहका बहका मन...

Limbă: hindi
Legare: Carte broșată
Disponibilitate: Așteptăm intrarea în stoc
Ediția 30. 06. 2026
74.32 lei
यह काव्य-संग्रह जीवन, आत्ममंथन और आध्यात्मिक अनुभूति की एक संवेदनशील यात्रा है। इन कविताओं में नियति...

Informații despre carte

Limbă
hindi
Legare
Carte - Carte broșată
Publicat
2026
Pagini
56
EAN
9789376428298
ISBN
9376428293
Enbook ID
53024916
Greutate
67
Dimensiuni
127 x 203 x 3

Descriere completă

यह काव्य-संग्रह जीवन, आत्ममंथन और आध्यात्मिक अनुभूति की एक संवेदनशील यात्रा है। इन कविताओं में नियति, असमंजस, आस्था, दरार, प्रतीक्षा और भीतर जन्म लेती उम्मीद की गहरी अभिव्यक्ति है। कहीं अदरकी चाय-सी आत्मीयता है, तो कहीं शून्यकाल, बारिशों के खेत, महादेव और कृष्ण आगमन जैसे भाव जीवन को नए अर्थ देते हैं। यह संग्रह पाठक को ठहरकर सोचने, महसूस करने और अपने भीतर झाँकने का शांत आमंत्रण देता है